भारत में Core VLSI Skills क्यों चर्चा में हैं?
भारत के Semiconductor Design Global Capability Centres (GCCs) में हाल ही में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है: लगभग 48% रोजगार अवसर अब core VLSI skills वाले इंजीनियरों के लिए खुल रहे हैं।
यह संख्या सिर्फ एक आँकड़ा नहीं, बल्कि यह बताती है कि भारत अब सिर्फ कर्मचारियों की संख्या पर नहीं बल्कि गुणवत्ता-स्किल पर फोकस कर रहा है।
इस लेख में हम जानेंगे कि यह ट्रेंड क्या है, क्यों आया है, यह आपके करियर पर क्या असर डाल सकता है, और इस सेक्टर में सफल होने के लिए किन कौशलों की जरूरत है।
1. क्या है “core VLSI skills”?
“VLSI” यानी Very-Large-Scale Integration – यह तकनीक उन चिप्स/इंटीग्रेटेड सर्किट्स (ICs) को डिजाइन और विकसित करती है जिनमें लाखों ट्रांजिस्टर होते हैं।
जब हम कहते हैं “core VLSI skills”, तो हम इन क्षमताओं की बात कर रहे हैं:
- Digital design (RTL, Verilog/VHDL)
- Verification & validation
- Physical design, layout, timing closure
- Analog & mixed-signal design
- EDA tools (Synopsys, Cadence आदि) का प्रयोग
- Embedded systems, firmware, SoC (System-on-Chip) integration
उदाहरण के तौर पर: एक कंपनी जिस चिप को स्मार्टफोन में लगाना चाहती है, वह चाहती है कि उसके इंजीनियर केवल कोड लिखें नहीं बल्कि “silicon ready” डिजाइन करें – यही “core VLSI skills” हैं।
2. भारत में Semiconductor Design GCCs में क्या बदलाव हुआ है?
पिछले सालों में भारत में Semiconductor Design GCCs की संख्या बढ़कर 79 केंद्रों तक पहुंच गई है, जो 2024 में लगभग 70 थीं।
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि नौकरी के अवसरों की संख्या में थोड़ी गिरावट आई है – Q1 FY26 में लगभग 2,874 पद खुले, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 3,684 थे।
इसका क्या मतलब है?
- भारी भर्ती रणनीति से हटकर विशिष्ट स्किल-हायरिंग की ओर
- “संख्या” से “गुणवत्ता” की तरफ बदलाव
- कंपनियाँ अब ऐसे इंजीनियर चाहती हैं जिनके पास सिर्फ बुनियादी ज्ञान न हो, बल्कि प्रोडक्ट-डिजाइन-से-सिलिकॉन तक की समझ हो
3. 48% का आंकड़ा – इसे समझें
कैरियरनेट (Careernet) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के शीर्ष Semiconductor Design GCCs में जो खुली नौकरियाँ हैं, उनमें लगभग 48% को “core VLSI skills” वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षित माना गया है।
इसके पीछे क्या कारण हैं?
- डिजिटल इंटिग्रेशन, गहरी SoC डिजाइन, AI/ML-अनुकूल चिप्स की मांग बढ़ रही है।
- पारंपरिक IT-GCC मॉडल से हटकर हाई-एंड R&D डेवलपमेंट की ओर झुकाव है।
- भारत को सिर्फ परिसंपादन केंद्र (outsourcing hub) नहीं, बल्कि इनोवेशन-होम बनना है।
4. करियर अवसर – आपके लिए क्या मायने रखता है?
यदि आप इलेक्ट्रॉनिक्स, ECE या VLSI बैकग्राउंड से हैं, तो यह समय बेहद अहम है।
यहाँ कुछ प्रमुख करियर-विकल्प दिए गए हैं:
- Digital Design Engineer – RTL से लेआउट तक
- Verification Engineer – डिजाइन की सहीता जाँचे
- Physical Design / Back-End Engineer – पावर, टाइमिंग, लेआउट
- Analog/Mixed-Signal Engineer – सिग्नल ट्रांसफॉर्मेशन, RF आदि
- Firmware / Embedded Systems Engineer – हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर इन्टिग्रेशन
- EDA Tool Developer / Automation Specialist – अगले चिप्स को डिज़ाइन करने में मदद
स्किल्स की सूची (आपको इनकी जरूरत है)
- RTL coding (Verilog/VHDL)
- EDA टूल्स (Cadence, Synopsys etc.)
- Simulation & Debugging
- पावर, टाइमिंग, लेआउट ऑप्टिमाइजेशन
- SoC Architecture, Embedded Software
- टीम वर्क, समस्या समाधान (Problem-Solving), कम्युनिकेशन स्किल
5. क्यों अभी इसकी मांग इतनी तेज़ है?
- Global chip shortage – अधिक चिप्स, अधिक डिजाइन कार्य।
- Geopolitical shifts – चिप्स अधिकांश देशों से हटकर अब India जैसे देशों में निर्मित हो रहे हैं।
- India Semiconductor Mission (ISM) के कारण भारत में निवेश बढ़ा है।
- डिजिटल उपकरण, AI, IoT, 5G – सारी तकनीकें चिप्स पर निर्भर हैं।
इसलिए जब उद्योग कहता है कि “core VLSI skills drive opportunities”, तो यह सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा बता रहा है।
6. चुनौतियाँ और जिनके लिए तैयार रहें
हर सुनहरी अवसर की तरह इसमें चुनौतियाँ भी हैं:
- स्किल-गैप: बहुत से अभ्यर्थी VLSI का नाम जानते हैं, मगर प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस कम होता है।
- प्रतिस्पर्धा: 48% मौका सुनहरा है, लेकिन इसमें योग्य उम्मीदवारों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।
- रोजगार की संख्या में वृद्धि धीमी हो सकती है – वहाँ “उच्च मात्रा” की भर्ती कम हो चुकी है।
- नवीन तकनीकें (AI/ML, Heterogeneous Integration) तेजी से आ रही हैं – लगातार सीखना जरूरी।
7. कैसे तैयार हों – एक संक्षिप्त रोडमैप
- मजबूत बुनियाद बनाएं: डिजिटल डिज़ाइन, Verilog/VHDL, लेआउट, टाइमिंग जैसी बुनियादी स्किल सीखें।
- प्रैक्टिकल काम करें: प्रोजेक्ट लें, इंटर्नशिप करें, EDA टूल इस्तेमाल सीखें।
- विशिष्ट स्किल्स अपनाएं: वेरिफिकेशन, SoC आर्किटेक्चर, फर्मवेयर इन्टिग्रेशन।
- नेटवर्क बनाएं: लिंक्डइन, फोरम, VLSI कम्युनिटी में जुड़ें।
- ब्रोकन कंपनियों के बजाय इनोवेटिव कंपनियों की तलाश करें: जो डिजाइन-लेड हैं, उत्पादन-केन्द्र नहीं सिर्फ सेवा-प्रदाता।
- लगातार अपडेट रहें: नए चिप आर्किटेक्चर, EDA टूल्स, AI/ML इंटीग्रेशन – इन पर नजर रखें।
8. सारांश (Takeaway)
- भारत में Semiconductor Design GCCs में 48% नौकरियाँ core VLSI स्किल्स वाले इंजीनियरों के लिए खुल रही हैं।
- यह संकेत है कि अब उद्योग “मेरा काम जल्दी कर लो” से हटकर “मेरी कठीन समस्या हल करो” की ओर बढ़ रहा है।
- उन विद्यार्थियों और युवा इंजीनियरों के लिए यह सुनहरा अवसर है जिन्होंने समय पर स्किल्स ली हों और प्रैक्टिस की हो।
- चुनौतियाँ हैं, लेकिन तैयारी के साथ यह करियर ट्रैक बहुत promising है।
“जितना बेहतर आपका RTL होगा, उतनी ही बेहतर दुनिया की चिप्स को डिज़ाइन करने में आपकी भूमिका होगी।”
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. भारत में Core VLSI skills क्या हैं और क्यों जरूरी हैं?
उत्तर:
Core VLSI skills वे तकनीकी क्षमताएँ हैं जिनसे सेमीकंडक्टर चिप्स को डिज़ाइन, टेस्ट और मैन्युफैक्चर किया जाता है – जैसे RTL कोडिंग, वेरिफिकेशन, लेआउट, टाइमिंग एनालिसिस और SoC डिज़ाइन।
इन स्किल्स की मांग इसलिए बढ़ रही है क्योंकि भारत अब दुनिया के Semiconductor Design Hub के रूप में उभर रहा है और कंपनियाँ deep-tech engineers चाहती हैं।
2. भारत के Semiconductor Design GCCs में 48% नौकरियाँ Core VLSI skills पर क्यों आधारित हैं?
उत्तर:
क्योंकि कंपनियाँ अब quantity hiring से हटकर quality hiring पर ध्यान दे रही हैं।
AI, 5G, और IoT जैसी नई तकनीकों के लिए अधिक जटिल और power-efficient चिप्स चाहिए।
इसलिए ऐसे इंजीनियर जिनके पास core VLSI design, verification और silicon-to-product understanding है, उनकी मांग सबसे ज्यादा है।
3. Core VLSI engineer बनने के लिए कौन-सी पढ़ाई या डिग्री जरूरी है?
उत्तर:
आमतौर पर निम्नलिखित डिग्रियाँ उपयुक्त होती हैं:
B.Tech/B.E. in Electronics, ECE, Electrical, Instrumentation
M.Tech in VLSI Design, Microelectronics, Embedded Systems
साथ ही Cadence, Synopsys, Mentor Graphics जैसे टूल्स की ट्रेनिंग से करियर और तेज़ी से आगे बढ़ता है।
4. VLSI jobs के लिए भारत में कौन-से शहर सबसे बेहतर हैं?
उत्तर:
भारत में VLSI Design और Semiconductor GCCs के प्रमुख हब हैं:
बेंगलुरु (Bangalore) – भारत का Silicon Valley
हैदराबाद (Hyderabad) – कई global design centers
नोएडा और गुरुग्राम (NCR) – तेजी से बढ़ते semiconductor hubs
चेन्नई और पुणे – R&D labs और testing centres के लिए प्रसिद्ध
5. आने वाले वर्षों में VLSI jobs का भविष्य कैसा है?
उत्तर:
रिपोर्ट्स के अनुसार 2030 तक भारत में Semiconductor Design market $110 बिलियन तक पहुंच सकता है।
इससे लाखों नए VLSI Design, Testing, Verification और Embedded Hardware जॉब्स बनेंगे।
India Semiconductor Mission (ISM) के साथ भारत वैश्विक स्तर पर Chip Design Destination बनने की दिशा में है।
Disclaimer
यह लेख सार्वजनिक रिपोर्ट्स, इंडस्ट्री विश्लेषण और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। यह किसी विशेष नौकरी या कंपनी की गारंटी नहीं देता। करियर के संबंध में निर्णय लेने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श करना उचित होगा।