सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में बड़ी तेजी देखी जा रही है — लेकिन साथ ही एक चौंकाने वाला ट्रेंड भी सामने आया है: entry-level semiconductor design jobs में गिरावट, जबकि निचले लेकिन स्पेशलाइज़्ड स्किल्स की मांग में उछाल आ रहा है। यानी, “entry-level semiconductor design jobs” की संख्या घट रही है, लेकिन उन्हें भरने के लिए आवश्यक “निचे स्किल्स” यानी विशिष्ट तकनीकी क्षमताओं की मांग बढ़ रही है।
इस लेख में हम समझेंगे कि ऐसा क्यों हो रहा है, इसका असर उन युवाओं पर क्या होगा जो इस क्षेत्र में शुरुआत करना चाहते हैं, और वे किन स्किल्स से खुद को बेहतर बना सकते हैं।
1. क्या वास्तव में entry-level semiconductor design jobs कम हो रही हैं?
आप सोच सकते हैं — जब सेमीकंडक्टर फील्ड में इतना निवेश हो रहा है, नौकरियाँ क्यों कम हो रही होंगी? ये सवाल जायज़ है। हाल के डेटा बताते हैं कि भारत के शीर्ष सेमीकंडक्टर डिजाइन GCCs (Global Capability Centres) में खुले पदों की संख्या 2024-25 में लगभग 15 % तक गिर गई है।
उदाहरण के लिए: एक रिपोर्ट के अनुसार, इन GCCs में मई 2024 में प्रति माह ~3,760 पद खुल रहे थे, जो जनवरी 2025 में ~3,040 तक घट गए।
इसका मतलब यह नहीं कि उद्योग खत्म हो रहा है – बल्कि यह संकेत है कि कंपनियाँ अब बड़े पैमाने पर जॉब्स खोलने की बजाय विशिष्ट स्किल-सेट वाले लोगों को चुन रही हैं।
2. लेकिन नीचे स्किल्स की मांग क्यों बढ़ रही है?
जब entry-level semiconductor design jobs घट रही हैं, तो यह बदलाव अचानक नहीं आया – यह बदलाव इंडस्ट्री की सेवा-मॉडल, गहराई वाले डिज़ाइन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का परिणाम है।
कुछ प्रमुख कारण:
- उन्नत चिप्स की मांग — AI, 5G, IoT, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स जैसी टेक्नोलॉजी में चिप्स से अपेक्षा बढ़ी है, इसलिए सरल काम कम हो गया है। उदाहरण के लिए जिस रिपोर्ट में 48% पद “core VLSI skills” वाले लोगों के लिए बताए गए हैं।
- स्वचालन (automation) और टूल-उन्नयन — EDA (Electronic Design Automation) टूल्स, AI-सहायित डिज़ाइन, और क्लाउड-सिमुलेशन ने कई एंट्री-लेवल कार्यों को कम किया है।
- ग्लोबल सप्लाई चेन और भू-राजनीतिक प्रभाव — चिप्स का निर्माण और डिजाइन अब केवल भारत नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर हो रहा है, जिससे भर्ती रणनीतियाँ बदल गयी हैं।
- गुणवत्ता पर फोकस — अब कंपनियाँ संख्या की बजाय गुणवत्ता-हायरिंग पर जोर दे रही हैं। मतलब, “मुझे 100 लोगों की जरूरत थी”, अब “मुझे 20 ऐसे लोग चाहिए जो ‘entry-level’ से ऊपर उठ सकें”।
3. entry-level semiconductor design jobs की कमी का असर युवाओं पर
युवा इंजीनियरों और अभ्यर्थियों के लिए यह बदलाव चिंता का विषय हो सकता है – खासकर उन छात्रों के लिए जिन्होंने “entry-level semiconductor design jobs पाने” की तैयारी ही की थी।
निचे कुछ प्रभाव दिए गए हैं:
- ऑफर्स कम मिलना – कई छात्रों के अनुभवों के अनुसार, आवेदन तो कर रहे हैं, लेकिन कॉल-बैक बहुत कम आ रहे हैं।
- वेतन में दबाव – चूंकि प्रतिस्पर्धा बढ़ गयी है, इसलिए शुरुआती वेतन अपेक्षा से कम हो सकता है।
- स्किल गेप का खतरा – जिन स्किल्स की मांग है, अगर आपने उन्हें नहीं सीखा तो आप “entry-level” श्रेणी में रह सकते हैं लेकिन चयनित नहीं हो सकते।
- उम्मीदें प्रभावित होना – यह बदलाव morale पर असर डाल सकता है, लेकिन सकारात्मक रूप से देखें — यह अवसर का संकेत भी है।
4. किन स्किल्स की मांग बढ़ रही है – नीच-स्किल्स (niche skills) की सूची
यहाँ आपको वो प्रमुख स्किल्स दी गयी हैं जिनकी मांग बढ़ रही है – यानी निचे-स्किल्स जो “entry-level semiconductor design jobs” की जगह आजदार मूव बना सकते हैं:
- Digital Design / RTL Coding (Verilog/VHDL)
- Verification Techniques (UVM, SystemVerilog)
- Physical Design / Layout / Timing Closure
- Analog & Mixed-Signal Design
- EDA Tools Proficiency (Synopsys, Cadence, Mentor Graphics)
- Embedded Systems / Firmware Integration
- Yield Analysis, Process Engineering
- EDA Automation / Scripting (Python, TCL)
- AI/ML Integration in Chip Design
उदाहरण के लिए: एक रिपोर्ट कहती है – “core VLSI skills account for 48% of all job openings in India’s semiconductor design GCCs”.
इसका अर्थ स्पष्ट है – यदि आपने ये स्किल्स सीखी हैं, तो प्रतिस्पर्धा में आगे रह सकते हैं।
5. क्या मतलब है “entry-level semiconductor design jobs” अब बदल रहा है?
हां – “entry-level semiconductor design jobs” अब वही नहीं रह गए जो 5-10 साल पहले थे।
कुछ प्रमुख बदलाव:
- पहले: B.Tech पास आउट → “Junior Design Engineer” पद → बड़ा अवसर।
- अब: B.Tech पास आउट + internship/project experience + niche tool-skill → “Junior Design Engineer” पद → बड़ा अवसर।
- मतलब यह है कि शुरुआती स्तर पर भी स्किल-सेट की अपेक्षा बढ़ गयी है।
इस बदलाव का मतलब: एंट्री-लेवल जॉब्स की संख्या कम नहीं बल्कि उनकी पहुँच और योग्यता-मापदंड बदल गए हैं।
6. कैसे तैयार हों – एक रोडमैप
यदि आप इस सेक्टर में शुरुआत करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कदम आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं:
- मजबूत बुनियाद बनाएँ
- डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रोप्रोसेसर, Verilog/VHDL सीखें।
- छोटे प्रोजेक्ट्स या ऑनलाइन कोर्स करें।
- प्रैक्टिकल अनुभव हासिल करें
- ईंटर्नशिप करें, कॉलेज-प्रोजेक्ट्स में ASIC/FPGA देखभाल करें।
- GitHub में अपना कोड रखें, Hackathons में भाग लें।
- निचे-स्किल्स पर फोकस करें
- EDA Tools सीखें (Synopsys, Cadence)।
- Verification flow, Timing Closure, Layout basics समझें।
- Python, TCL, Matlab-स्क्रिप्टिंग सीखें।
- नेटवर्किंग करें
- लिंक्डइन पर VLSI डिजाइन इंजीनियर्स से जुड़ें।
- ग्लोबल/देशीय फोरम्स में भाग लें।
- अपडेट रहें
- सेमीकंडक्टर डिज़ाइन में AI, ML, पैकेजिंग, Code‐एएमपी, RF डिज़ाइन जैसे क्षेत्रों में हो रहे बदलाव देखें।
- सरकारी योजनाओं जैसे India Semiconductor Mission (ISM) को समझें।
7. निष्कर्ष – अवसर हैं, लेकिन राह बदल चुकी है
“entry-level semiconductor design jobs” की संख्या कम हो रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अवसर खत्म हो गए हैं। बल्कि, यह संकेत है कि स्थिरता, गुणवत्ता और विशिष्ट स्किल-सेट वाली नौकरियों की ओर रुख बना है।
यदि आपने उस दिशा में काम किया है – सही स्किल्स सीखी हैं, प्रोजेक्ट्स किए हैं, नेटवर्किंग की है – तो यह समय आपके लिए स्वर्णिम अवसर हो सकता है।
और यदि अभी शुरुआत करनी है, तो बहुत देर नहीं हुई है – बस तैयार रहने की जरूरत है।
Disclaimer
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्ट्स, इंडस्ट्री सुझावों एवं विशेषज्ञ विश्लेषण पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी को करियर-निर्णय या नौकरी की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। करियर से सम्बंधित महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित होगा।